कसूरवार

डॉक्टर के पास एक अजीब सा केस आया एक महिला ने डॉक्टर को बताया कि हमारा बेटा पढ़ा लिखा है, जवान है, शादीशुदा है । हमने उसकी पढ़ाई लिखाई उसकी परवरिश पर पानी की तरह पैसा बहाया ।उसे दुनिया का हर सुख और ऐश-ओ-आराम दिया लेकिन फिर भी वह हमसे प्यार नहीं करता। यह सुनकर डॉक्टर ने हैरानी से उस महिला से पूछा ऐसा कैसे हो सकता है….? आपका अपना बेटा और आप से प्यार ना करें ऐसा कैसे संभव है….? यह सुनकर महिला ने कहा मैं सच कह रही हूँ डॉक्टर साहब… वह हम से ज्यादा दूसरों को प्यार करता है । दूसरों को डॉक्टर ने फिर हैरान होकर पूछा… दूसरा कौन….? तो उस महिला ने जवाब दिया अपने नाना-नानी अपने मामा-मामी… उनको हमसे ज्यादा चाहता है उनसे प्यार करता हैं । हमसे तो उसका रिश्ता सिर्फ पैसे लेने तक ही सीमित रहा। डॉक्टर की हैरानी और बढ़ गई थी ।उस ने फिर पूछा क्या आपका बेटा आपसे ज्यादा आपके माता पिता के संपर्क में रहता है …? यह सुनकर महिला बोली “डॉक्टर साहब अब तो नहीं अब मेरे माता पिता गुजर गए हैं”। हां बचपन में जरूर उनके पास ज्यादा रहा । मैं यहां से काफी दूर एक सरकारी स्कूल में अध्यापिका थी । जब वह पैदा हुआ मेरे पास उसकी देखभाल के लिए कोई नौकर या रिश्तेदार नहीं था और मुझे स्कूल में हाजिरी देनी थी इसलिए मजबूरन मुझे अपने ढाई महीने के बेटे को अपने माता पिता यनिके उसके नाना, नानी के पास छोड़ना पड़ा ।वहीं पर उसका बचपन बीता उसका लालन-पालन हुआ उसके नाना नानी मामा, मामी ने उसका ख्याल रखा। जब थोड़ा बड़ा हुआ तो उसे स्कूल में दाखिला दिलवाया वह तो जब तीसरी कक्षा में पढ़ रहा था तब मेरा तबादला मेरे मायके के नजदीक हो गया तो हम उसे अपने पास ले आए ।रहता तो हमारे पास वह जरूर था लेकिन उसका मन ज्यादा अपने नाना-नानी के पास ही लगता था ।जब कि हमने उसे हर सुख सुविधा दी जो उसने मांगा। उसकी हर ख्वाहिश पूरी की लेकिन शायद वह दिल से कभी हमारा नहीं हुआ। और आज तक दूरी कायम है।
डॉक्टर ने एक लंबी से सांस लेते हुए कहा ओ…हो…. अब आया सारा माजरा मेरी समझ में। अब जिस बच्चे को आपने ढाई महीने की उम्र में अपने से अलग कर दिया उससे आप बहुत ज्यादा प्यार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ।एक अबोध बालक जिसको अच्छे, बुरे सच,झूठ की पहचान ही नहीं थी उससे आप बेपनाह मोहब्बत की उम्मीद कहां तक लगा सकते थे । उस उम्र में तो बच्चा केवल प्यार का भूखा होता है। जो उससे प्यार मोहब्बत करता है बस उसी का होकर रह जाता है । यही शायद उसके साथ भी हुआ उसके नाना ,नानी मामा ,मामी या पास पड़ोस के लोगों ने उसे अपनी गोद में खिलाया उससे प्यार किया तो उसका लगाव उनकी तरफ होना स्वाभाविक ही था । जब आप उसे अपने पास वापिस लेकर आए तब तक तो वह बड़ा हो चुका था जो प्यार उसके मन में रच बस गया था वह तो आप चाहकर भी नहीं हटा सकते थे । आप कुछ भी कर लो वह अपने बचपन का प्यार भुला ही नहीं सकता मरते दम तक।
उस उम्र में आप बच्चे के पास रुपयों के ढेर लगा दो या पैसे से खरीद कर दी जाने वाली हर सुख सुविधा दे दो उसके लिए इन चीजों का कोई मोल नहीं ।वह तो वहीं जाएगा जहां उसे प्यार ,दुलार ,पुचकार मिलेगा। उसे घुमाएगा,फिराएगा, खिलाएगा, पिलाएगा, हंसाएगा,गुदगुदाएगा। आप की तरफ से उसे हर सुख सुविधा पैसा सब कुछ भरपूर मिला लेकिन शायद आपकी मजबूरी के कारण माँ का प्यार उसे उतना नहीं मिल पाया जिसका वह उस समय असल मे हकदार था । और वह प्यार उसे उसके नाना, नानी के रूप में मिल गया जो उसके मासूम हृदय मैं सदा सदा के लिए बस गया। इसमें आपके बेटे का क्या कसूर है ……? आप भी तो अपनी मजबूरी के चलते उससे उतना प्यार नहीं कर पाए जितना अगर वह आपके पास होता तो आप ज़रूर करते।
कसूरवार न आप हो न आपका बेटा। मजबूर आप भी थे और वह भी ।उसे सच्चा प्यार जहां मिला वहीं का हो लिया उन्हीं का होकर रह गया और उम्र भर रहेगा यही उसकी बचपन की सच्ची मोहब्बत का सिला है।
कहीं ऐसा तो नहीं जैसा आपको लगता है कि आपका बेटा आपको प्यार नहीं करता। वैसा ही कहीं वह भी यही महसूस करता हो की उसके मां-बाप ने उसे वह सब कुछ तो दिया जो पैसे से खरीदा जा सकता था मगर प्यार,मुहब्बत में कुछ कमी सी रह गयी……।

दीपक “कुल्लुवी”
दीपक साहित्य सदन
शमशी जिला कुल्लू हिमाचल प्रदेश
17512 6 पिन कोड
मो0 नं0: 8894541484

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